यह क्या है
चना दाल, देसी चने या बंगाल ग्राम का छिलका उतरा हुआ, दो टुकड़ों में बँटा दाना है (Cicer arietinum L.)। आप इसे चना दाल (Chana dal) के नाम से जानते हैं।
यह सूखी, टूटी दाल के रूप में बिकती और रखी जाती है। भारत में इसे अलग‑अलग जगहों पर कडलाई परुप्पु (तमिल), सेनगा पप्पु (तेलुगू), कडले बेले (कन्नड़), कडला परिप्पु (मलयालम) और हरभरा दाल (मराठी) भी कहते हैं।
स्वाद और खुशबू
स्वाभाविक रूप से नट जैसा और हल्की मिठास वाला स्वाद। पकने पर दाने घुलते नहीं, अलग‑अलग रहते हैं और अंदर से क्रीमी होते हैं। कच्ची दाल को गरम तेल में भूनने से गहरी भुनी खुशबू आती है और करारा क्रंच मिलता है।
खाने में इस्तेमाल
कब डालें
चटनी और चावल के लिए, तड़के में कच्ची चना दाल को गरम तेल या घी में भूनें ताकि टोस्टेड खुशबू और करारी बाइट मिले।
मुख्य‑पकवान करी और स्ट्यू के लिए, दाल भिगोकर शुरू में ही डालें, फिर तब तक धीमी आँच पर पकाएँ या कुकर में प्रेशर‑कुक करें जब तक दाने नरम न हो जाएँ। यही बंगाली छोलार दाल की आधार दाल है, जिसे साबुत मसालों, किशमिश और भुने ताज़ा नारियल के साथ धीमी आँच पर पकाया जाता है।
मीठों के लिए, दाल को उबालकर मसलें और गुड़ या चीनी के साथ पकाएँ ताकि पूरण या पायसम बने। इलायची वाला यह मीठा पेस्ट महाराष्ट्रियन पुरण पोळी की क्लासिक भराई है। भिगोई हुई दाल को मोटा पीसकर, प्याज़ और हरी जड़ी‑बूटियों के साथ, साउथ इंडियन मसाला वडा की बुनियाद बनती है।
इसकी जगह क्या डालें
- Yellow split peasपकने का समय और दाने की कड़कपन लगभग समान होता है, स्वाद थोड़ा ज्यादा मिट्टीला और स्टार्ची होता है।
कहाँ से आया और कहाँ उगता है
चना खेती की जड़ें फर्टाइल क्रेसेंट तक जाती हैं और भारतीय उपमहाद्वीप में हड़प्पा काल से इसका उल्लेख मिलता है। भारत में प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात हैं।
कहाँ उगता है
खरीदना और रखना
अच्छी क्वालिटी कैसे पहचानें
एक जैसे सुनहरे‑पीले दाने देखें जिनमें फाँक समान हो। पाउडर जैसी धूल, ज्यादा टूटे टुकड़े या नमी के कोई निशान हों तो दाल न लें।
मिलावट की आसान जाँच
FSSAI का डीएआरटी मैनुअल बताता है कि चना दाल के पानी के अर्क में सघन हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाने पर अगर तुरंत मैजेंटा या गुलाबी रंग उभर आए तो यह कृत्रिम मेटानिल येलो का संकेत है। FSSAI यह भी चेतावनी देता है कि इसमें केसरी दाल (Lathyrus sativus) मिलाई जा सकती है, जिसे उसके पच्चरनुमा, चपटे बाहरी आकार और तिरछी कट से पहचाना जा सकता है।
कैसे रखें
सूखी चना दाल को एयरटाइट डिब्बे में, ठंडी और नमी‑रहित जगह रखें, और कीड़ों से बचाकर रखें।
कितने दिन चलता है: 12 महीने तक, जब सील बंद रखी जाए और सूखी‑अँधेरी जगह पर हो।
पोषण
पौधे‑आधारित प्रोटीन और जटिल कार्बोहाइड्रेट का घना स्रोत, बहुत कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ज्यादा डायटरी फ़ाइबर के साथ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चना दाल क्या होती है?
यह देसी चने या बंगाल ग्राम (Cicer arietinum L.) का छिलका उतरा हुआ, दो टुकड़ों में बँटा दाना है।
तड़के या करी में चना दाल कब डालें?
तड़के के लिए कच्ची दाल को गरम तेल या घी में भूनें ताकि चटनी और चावल में क्रंच आए। करी और स्ट्यू के लिए दाल भिगोकर शुरू में डालें, फिर नरम होने तक धीमी आँच पर पकाएँ या प्रेशर‑कुक करें।
चना दाल का पकने पर स्वाद और बनावट कैसी होती है?
पकी हुई चना दाल दानेदार रहती है और अंदर से क्रीमी लगती है, स्वाद स्वाभाविक रूप से नट जैसा और हल्का मीठा होता है। इसे भूनने पर गहरी भुनी खुशबू और करारा बाइट मिलती है।
किन व्यंजनों में चना दाल इस्तेमाल होती है?
बंगाली छोलार दाल जिसमें साबुत मसाले, किशमिश और भुना ताज़ा नारियल होता है; महाराष्ट्रियन पुरण पोळी का मीठा पूरण; साउथ इंडियन मसाला वडा; और पायसम।
चना दाल की जगह क्या इस्तेमाल कर सकते हैं?
पीली स्प्लिट मटर यानी Yellow split peas करी और स्ट्यू में चल जाती है, पकने का समय और दाने की कड़कपन मिलते‑जुलते हैं, बस स्वाद थोड़ा ज्यादा मिट्टीला और स्टार्ची होता है।







