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Pakwanpedia

मसूर दाल

Masoor dal

दाल

छिलका उतरी, फूटी हुई मसूर दाल जल्दी गल जाती है, स्वाद हल्का मिट्टी-सा और थोड़ा नट जैसा होता है। लहसुन, जीरा और सूखी मिर्च का तड़का इसे खूब जंचता है।

Close-up texture of orange split masoor lentils
दूसरे नाम:Bengali Musur dalTamil Masoor paruppuTelugu Masoor pappuMarathi Masoor dal

यह क्या है

मसूर दाल (Masoor dal) लेन्टिल पौधे (Lens culinaris) के बीज का छिलका हटाकर फूटा हुआ रूप है, जो Fabaceae परिवार का है।

यह सूखी बेची जाती है। साबुत दाने भी मिलते हैं जिनका छिलका सलामत रहता है, इन्हें साबुत मसूर कहते हैं, और ये खाने योग्य बीज सालाना मसूर की फलियों से निकाले जाते हैं।

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स्वाद और खुशबू

मिट्टी जैसामेवे जैसामीठा

पकी मसूर दाल का स्वाद हल्का, मिट्टी-सा और थोड़ी नट वाली खुशबू के साथ हल्की मिठास लिए होता है। यह लहसुन, जीरा और सूखी मिर्च जैसे तड़के और खुशबुओं को आसानी से सोख लेती है। धीमी आँच पर पकाने से इसका नट जैसा स्वाद और उभरता है।

खाने में इस्तेमाल

कब डालें

पकाते समय

उत्तर और पूर्व भारत के घरों में रोज़ की दाल तड़का के लिए धुली मसूर बिना भिगोए ही बहुत जल्दी गल जाती है। शुरुआत में दाल डालें और नरम, क्रीमी होने तक उबालें, फिर ऊपर से तड़का लगाएँ।

बंगाली खाना में मुसुरीर दाल को कलौंजी और हरी मिर्च के छौंक से बनाया जाता है। टोक दाल कच्चे हरे आम के साथ पकती है ताकि खट्टा स्वाद आए।

इसकी जगह क्या डालें

  • Split yellow moong dalलगभग उतने ही जल्दी पकती है और मिलती-जुलती मुलायम बनावट देती है।

कहाँ से आया और कहाँ उगता है

मसूर दलहन फसलों में सबसे पुरानी घरेलू फसलों में है, जिसकी शुरुआत फ़र्टाइल क्रेसेंट से मानी जाती है। पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि भारतीय उपमहाद्वीप में इसकी खेती सिंधु घाटी सभ्यता के समय से हो रही थी।

कहाँ उगता है

Madhya Pradesh Uttar Pradesh West Bengal Bihar Rajasthan

खरीदना और रखना

अच्छी क्वालिटी कैसे पहचानें

एकसार आकार की साबुत या धुली दाल चुनें, जिनका प्राकृतिक रंग चमकीला हो और बनावट सूखी हो। इनमें कचरा, जाले या कीट-नुकसान न हो।

मिलावट की आसान जाँच

FSSAI के DART मैनुअल में बताया गया है कि मेटानिल येलो जैसे कृत्रिम रंग की जाँच के लिए थोड़ी दाल में पानी और हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिलाएँ; मिलावट होने पर दाने मैजेंटा या गुलाबी हो जाते हैं। FSSAI केसरी दाल की मिलावट को आँखों से जाँचने की भी सलाह देती है, जिसे कीलनुमा, तिरछे आकार से पहचाना जाता है।

कैसे रखें

सूखी मसूर दाल को एयरटाइट काँच या फूड-ग्रेड डिब्बे में ठंडी, अंधेरी और नमी-रहित जगह रखें।

कितने दिन चलता है: एयरटाइट रखकर गर्मी और नमी से दूर रखने पर 12 महीने तक।

पोषण

मसूर दाल में पौधे आधारित प्रोटीन, डायटरी फाइबर, आयरन, पोटैशियम और फोलेट भरपूर होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मसूर दाल भिगोना ज़रूरी है?

नहीं। धुली मसूर बिना भिगोए ही जल्दी गल जाती है, इसलिए आप इसे सीधे उबालकर नरम और क्रीमी होने तक पका सकते हैं।

मसूर दाल का स्वाद कैसा होता है?

इसका स्वाद हल्का और मिट्टी-सा होता है, जिसमें थोड़ा नट जैसा स्वाद और हल्की मिठास रहती है। लहसुन, जीरा और सूखी मिर्च जैसे तड़के की खुशबू इसे आसानी से लग जाती है।

बंगाली रेसिपी में मसूर दाल कैसे इस्तेमाल होती है?

मुसुरीर दाल में कलौंजी और हरी मिर्च का छौंक लगाया जाता है, और टोक दाल कच्चे हरे आम के साथ पकती है ताकि खट्टा स्वाद आए।

मसूर दाल की जगह क्या इस्तेमाल करूँ?

धुली पीली मूंग दाल लें। यह लगभग उतने ही कम समय में पकती है और वैसी ही मुलायम, क्रीमी बनावट देती है।

दाल में मिलावट कैसे जाँचें?

FSSAI के DART मैनुअल के अनुसार डाई टेस्ट में थोड़ा नमूना लेकर पानी और हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिलाएँ। अगर कृत्रिम रंग होगा तो दाने मैजेंटा या गुलाबी दिखेंगे। साथ ही केसरी दाल को भी देखें, इसका आकार कीलनुमा, तिरछा होता है।

फ़ोटो साभार: Ajay Suresh from New York, NY, USA, CC BY 2.0, via Wikimedia Commons