सामग्री
लिट्टी का आटा
सत्तू की भराई
चोखा
परोसने के लिए
बनाने का तरीका
लिट्टी की तैयारी
- 1
एक बाउल में आटा, नमक, बेकिंग सोडा (वैकल्पिक) और अजवाइन मिलाएँ। घी अच्छी तरह मलें ताकि आटा रेत जैसा लगे। पानी थोड़ा‑थोड़ा डालते हुए 3 से 4 मिनट कड़ा, आधा कसाव वाला आटा गूँधें; गीले कपड़े से ढककर 20 से 30 मिनट रख दें।
5 मिनटटिप: भराई थामने के लिए आटा रोटी के आटे से थोड़ा सख्त होना चाहिए।
- 2
भराई के लिए सत्तू, अदरक, लहसुन, हरी मिर्च, हरा धनिया, अजवाइन, कलौंजी, नमक, नींबू का रस, अचार मसाला और सरसों का तेल मिलाएँ। अच्छी तरह मिक्स करें; बहुत सूखा लगे तो बस कुछ बूँद पानी छिड़कें, ताकि दबाने पर सत्तू एक साथ पकड़े।
5 मिनटटिप: कच्चे सरसों के तेल और अचार मसाले की तीखी खुशबू आनी चाहिए, यही पहचान है।
- 3
रखा हुआ आटा बराबर नींबू के आकार की लोइयों में बाँटें। एक लोई को हथेली में कटोरी जैसा फैलाएँ, भराई का भरापूरा चम्मच रखें, किनारे कसकर चुटक से बंद करें और बिना दरार के चिकना गोल कर लें।
10 मिनटटिप: अगर दरार दिखे तो उँगली भिगोकर थोड़ा पानी लगाएँ और समतल कर दें।
- 4
ओवन को 190°C पर प्रीहीट करें। लिट्टियाँ ट्रे पर लगाएँ और 35 से 40 मिनट सेंकें, बीच में पलटें, जब तक ऊपर छोटे क्रैक आ जाएँ, अच्छा भूरापन दिखे और थपथपाने पर खोखली लगे।
40 मिनटटिप: पारंपरिक तरीका: कोयले या लकड़ी के अंगारों पर धीमी आँच में, बार‑बार घुमाते हुए, चारों ओर बराबर छाले आने तक सेंकें।
- 5
स्टोवटॉप विकल्प: अप्पे (पनियारम) पैन को मध्यम आँच पर गरम करें। लिट्टियाँ खाँचों में रखें और हर कुछ मिनट में घुमाते रहें, जब तक चारों तरफ बराबर सुनहरी भूरी होकर अंदर तक पक न जाएँ।
25 मिनटटिप: आँच मध्यम रखें ताकि परत जलने से पहले बीच तक पक जाए।
प्रो टिप्स: सत्तू में अचार मसाला: एक चम्मच अचार मसाला खटास और गरमाहट जोड़ता है, जिससे सूखा सत्तू फीका नहीं लगता बल्कि चटपटा हो जाता है। · कच्चा सरसों तेल इस्तेमाल करें: भराई और चोखे दोनों में बिना गरम किया सरसों तेल वह तीखा पंच देता है जो सूँघते ही बिहार का अहसास कराए। · शहरी किचन के लिए अप्पे पैन लिट्टी: ओवन नहीं है तो अप्पे पैन पर लिट्टी बराबर भुनती है और आकार बना रहता है।
चोखा बनाएँ
- 6
जब तक लिट्टियाँ पकें, तार जाली पर गैस की मध्यम आँच पर बैंगन और टमाटर को सीधा रखें और घुमाते हुए तब तक भूनें जब तक छिलके काले न हो जाएँ और गूदा बैठ न जाए। आलू को नमक वाले पानी में नरम होने तक उबालें, फिर छील लें।
15 मिनटटिप: चिमटे से दबाने पर भुना बैंगन अंदर तक मुलायम लगना चाहिए।
- 7
बैंगन और टमाटर के जले हुए छिलके उतार दें। एक बाउल में इन्हें उबले आलू के साथ मोटा‑मोटा मसलकर अच्छी तरह मिला दें।
5 मिनटटिप: थोड़ी बनावट रहने दें; चोखा पेस्ट नहीं होना चाहिए।
- 8
मसले हुए मिश्रण में प्याज़, लहसुन, हरी मिर्च, हरा धनिया, सरसों का तेल और नमक मिलाएँ। स्वाद चखकर नमक या सरसों के तेल को अपनी पसंद से समायोजित करें।
2 मिनटटिप: सरसों का तेल अंत में डालें ताकि उसकी खुशबू ताज़ी रहे।
प्रो टिप्स: बैंगन और टमाटर को खुली आँच पर सेंकें: सीधी आँच पर छिलका जलता है और चोखे के लिए जरूरी देहाती धुआँदार स्वाद बनता है।
परोसना
- 9
एक छोटे बाउल में घी पिघला लें। हर गरम लिट्टी को हल्का फोड़ें या बीच से खोलें, फिर पूरी तरह पिघले घी में डुबो दें ताकि घी अंदर तक सोख ले।
2 मिनटटिप: दरार देने से घी सत्तू की भराई तक अच्छी तरह पहुँचता है।
- 10
घी में भीगी लिट्टी तुरंत गरम चोखे के भरपूर हिस्से के साथ परोसें।
टिप: ऊपर कच्चे सरसों तेल की एक छोटी धार डालने से स्वाद ताज़ा रहता है।
प्रो टिप्स: लिट्टी को घी में पूरी तरह डुबोएँ: घी सत्तू की भराई को नरम करता है और सरसों तेल व मिर्च की धार को संतुलित करता है।
बनते हुए देखें
परोसना और रखना
कैसे परोसें
गरम लिट्टी को हल्का तोड़कर पिघले घी में डुबोकर परोसें, साथ में धुएँदार चोखे का भरापूरा हिस्सा रखें। साइड में घी की छोटी कटोरी रखें और चाहें तो चोखे पर अंत में कच्चे सरसों तेल की कुछ बूँदें डालें।
रखना और गरम करना
घी में न डुबोई हुई लिट्टी कमरे के तापमान पर 1 दिन तक ठीक रहती है; फ्रिज में 4 दिन तक रखें और परोसने से पहले ओवन या तवे पर गरम करें। चोखा उसी दिन सबसे अच्छा लगता है; फ्रिज में 24 घंटे तक रख सकते हैं, फिर कमरे के तापमान पर लाएँ या हल्का गरम करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बिना ओवन के लिट्टी कैसे बनाएँ?
हाँ। मध्यम आँच पर अप्पे (पनियारम) पैन में बार‑बार घुमाते हुए पकाएँ, या कोयले/लकड़ी के धीमे अंगारों पर सेंकें अगर उपलब्ध हों।
क्या आटे में बेकिंग सोडा ज़रूरी है?
नहीं। यह वैकल्पिक है और परत को थोड़ा हल्का बनाता है। अधिक पारंपरिक, कड़े काट के लिए इसे न डालें।
सत्तू की भराई बहुत सूखी लगे तो क्या करें?
कुछ बूँद पानी छिड़कें और फिर मिलाएँ, जब तक दबाने पर थामे। बनावट भुरभुरी रहे, पेस्ट न बने।
क्या चोखे में सरसों का तेल छोड़ सकते हैं?
यही इसकी पहचान है। अगर संवेदनशील हों तो कम डालें, पर थोड़ा कच्चा सरसों तेल ही इसे सच में बिहारी स्वाद देता है।
चूल्हा न हो तो धुआँदार स्वाद कैसे लाएँ?
बैंगन और टमाटर को गैस की सीधी आँच पर तब तक सेंकें जब तक छिलके काले न हो जाएँ। इससे चोखे में बढ़िया स्मोकी नोट आता है।
लिट्टी दाल बाटी से कैसे अलग है?
लिट्टी में मसालेदार सत्तू की भराई होती है और इसे सरसों तेल वाले चोखे के साथ खाते हैं, दाल के साथ नहीं। स्वाद और साथ परोसी जाने वाली चीजें अलग हैं।


